Types of transformer in Hindi -Different types

Different Types of Transformers and Their Applications.Transformer Types based on Voltage Level. Step-Down Transformer.Step-Up Transformer. Isolation 


Transformer kya hota hai
Transformer kya hota hai



Types of transformer -:


1.     Core के आधार पर   Core Types , Shell Types , Berry Typs T/f
2.     Voltage के आधार पर  Stapup , Stapdown T/f
3.     Supply के आधार पर   - Single phase ,Three phase T/f
4.     Intrumentation ke aadhar पर -  Current T/f , Potential T/f

Core types -:
 
Transformer kya hota hai
Transformer kya hota hai


Core types tansformer मे two की  winding होती है primary ओर             secondary winding जो  rectangular या egg shape , circular होती है जब primary वाइंडिंग को Ac supply से connect किया जाता है तब    प्राइमरी वाइंडिंग मे Ac Supply flow  होने लगती है ओर एसके साथ प्राइमरी वाइंडिंग flux generate होता है ओर जब ये flux sine wave के कारण change hota है ओर सेकोन्द्री वाइंडिंग से लिंक करता है जिसके कारण secondary winding मे output voltage प्राप्त होता है एसकी वाइंडिंग करना सिम्पल होता है
ये transformer भी अन्य transformer की तरह  ही work करता है

Shell types -:

 
shell typs transformer kya hota hai
typs of transformer
शैल types ट्रान्स्फ़ोर्मर मे प्रयुक्त रूप से E तथा I या u ओर T types की core प्रोयोग मे लायी जाती है shell types transformer छोटे आकार के होते है एस लिए transformer primary and secondary winding  core के मध्य बाले ( limb ) पर लिपटी होती होती है  shell types Transformer मे दो magnetic पथ बनते है ट्रांस्फोर्मर की winding दोनों तरफ से  core बाहरी limb से घिरी होने के कारण यह shell types transformer कहलाता है  shell types ट्रांस्फोर्मर मे flux का leakage बहुत कम होता है ओर एसका वोल्टेज regulation core types transformer की तुलना मे बहुत हाइ होता है
Core मे iron की मात्रा  अधिक होने के कारण ये ट्रांस्फोर्मर भार मे अधिक होते है

Berry types -:

 
berry typs transformer kya hota hai
typs of transformer in hindi
चित्र मे berry types ट्रांस्फोर्मर दिखाया गया गई  एसमे कई core types ट्रांस्फोर्मर के एक सिरे को मिलाकर  उस पर winding करते है  जिस के कारण ईसमे magnetic रास्ते बन जाता है  ईसमे यह advantage है  पर berry types ट्रांस्फोर्मर मे वाइंडिंग करना कठिन है ओर core बनाना भी कठिन है  ईस लिए berry types transformer प्रोयोगे मे कम लाये जाता है ईसमे work करने का तरीका other Transformer की तरह ही होता है
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Stapup Transformer -:



Transformer kya hota hai
Transformer kya hota hai

stap up ट्रान्स्फ़ोर्मर भी other ट्रान्स्फ़ोर्मर की तरह कार्य करते है लेकिन ये ट्रान्स्फ़ोर्मर वोल्टेज का लेवल बढ़ के आउटपुट पर प्राप्त होता है ये वोल्टेज के लेवल को बढ़ा के ईस लिए निकलता है क्योकि जो ईसमे प्राइमरी ओर सेकोन्द्री वाइंडिंग लगी है उनकी number of turns की संख्या दोनों वाइंडिंग की अलग अलग होती है जब हमको voltage अधिक चाहिए तब प्राइमरी side मे number of turns की संख्या कम होती है ओर secondary side मे  winding turns की संख्या अधिक होती है जिसके कारण हमे output voltage अधिक प्राप्त होता है
वोल्टेज का level उस transformer की winding turns पर डेपेंड होता है
                   T1<T2      turns ratio

                  T1/T2 = I2/I1  =   K
                                              Ratio of turns
                  T2/T1 =  I1/I2  = K

Stapdown Transformer -: 



Transformer kya hota hai
Transformer kya hota hai



वोल्टेज का लेवल उस ट्रांस्फोर्मर की वाइंडिंग turns की संख्या  पर डेपेंड होता है
Stapdown transformer भी अन्य transformer की तरह कार्य करते है लेकिन ये transformer voltage के  लेवल  घटा के आउटपुट पर प्राप्त होता है ये वोल्टेज के लेवल को घटा के ईस लिए निकलता है क्योकि जो ईसमे प्राइमरी ओर सेकोन्द्री वाइंडिंग लगी है उनकी number of turns की संख्या दोनों वाइंडिंग की अलग अलग होती है जब हमको voltage कम  चाहिए तब प्राइमरी side मे number of turns की संख्या अधिक  होती है ओर secondary side मे  winding turns की संख्या कम  होती है जिसके कारण हमे output voltage अधिक प्राप्त होता है ये ट्रान्स्फ़ोर्मर भी stapup ट्रान्फ़ोर्मर की तरह कम करता है
                   T1>T2      turns ratio

Current Transformer -:

 
current transformer kya hai
typs of transformer
Current transformer एक  stap up Transformer होता है जिसकी primary side मे कम बहुत कम या कभी कभी एक ही turns होते है  primary  side मे वह Current गुजारी जाती है जिसे मापना होता है ओर secondary side मे अधिक turns होते है जिससे current कम हो जाती है secondary side मे एक ampere लगा होता है जिससे current का मापन होता है ampere मीटर की स्केल सीधी primary के turns के अनुपात मे बटी होती है  क्योकि core का कम flux पर काम समान होता है एसलिए ईसका अनुपात हर लोड  पर समान होता है नोट करो की जब primary side मे current आ रही हो तब secondary side को खुला नही रखना चाहिए क्योकि की ऐसे खुला रखने से secondary side मे अधिक वोल्टेज हो जाएगी जिसके कारण core अधिक saturated हो जाएगी जिससे वह गर्म हो जाएगी ओर मगनेटिक विशेसता सदा के लिए समाप्त हो सकती है ऐसे मे किसी का हाथ उस पर रख जाए तो short भी लग सकता है ईसकी secondary winding को maximum 5 amp होती  है ईससे transformer भार कम पड़ता है लेकिन ईसी अनुपात डायल की 100 ampere के लिए बटा होता है


यह भी current transformer current transformer ही होता है जब H.T line की current मापना होता है तब क्लिप दबा कर line के उपर कर देते है वह line current transformerकी तरह काम करती है ओर क्लिप magnetic core का कार्य करती है  ओर ईसी पर कई turns लिपटे होते है जो दिखाई नही देते ओर वह secondary का कार्य करती है ओर एक ampere ईसके साथ parallel मे लगा होता है ओर ईसपे एक rang switch लगा होता है जिस पर current rang दी जाती है H.T current के अनुसार उसे अंदाज से सेट कर देते है बाद मे पूरी current पड़ लेते है

 Potential Transformer -:

 
potential transformer kya kam karta hai
typs of transformer
यह एक stap down transformer होता है जिससे अधिक मापने बाले वोल्टेज को primary side मे देकर सेकोन्द्री  वाइंडिंग से लगा  voltmeter से कम वोल्टेज लाते है उसी अनुपात से ही वोल्टेज मापी जाती है ईसकी secondary 110 volt तक मापने के लिए बनाई जाती है ओर ईस अनुपात से डायल कई हजार वोल्टेज तक बटी होती है

Three Phase Transformer -: 



Transformer kya hota hai
Transformer kya hota hai

आजकल जितनी भी electricity generate की जा रही है 11kv तक वोल्टेज generate किया जाता है फिर ईस 11kv के वोल्टेज को three phase transformer से ईस 11kv वोल्टेज को stap up किया जाता है ( 66kv, 132kv, 220kv, 400kv, ........... ) तक stap up करके आगे transmit किया जाता है ओर आगे consumer के लिय ईसी वोल्टेज को three phase transformer से stap down किया जाता है ( 100 volt , 400 volt , 230 volt etc ) बाहुत पहले  three phase transformers के लिय तीन अलग अलग एक फेज transformers को connect करके काम मे लाया जाता था  लेकिन अब थ्री फेज ट्रान्स्फ़ोर्मर ही प्रोयोग किया जाता है
Advantage -:
१.     स्थान कम घेरते है
२.     भार मे हल्के होते है
३.     कीमत मे 15% कम होते है
४.     connection ओर देखभाल एक ही Transformer की तरह ही करते है

Disadvantage -: थ्री फेज  ट्रान्स्फ़ोर्मर  हानि केबल यह है की अलग अलग एक फेज के ट्रान्स्फ़ोर्मर यदि खराब हो जाए तो supply वितरित होने बाली  बंद न करके 2/3 सप्लाइ  चालू हो सकती है जबकि की थ्री फेज ट्रान्स्फ़ोर्मर खराब हो जाए तो पूरी supply बंद करनी पड़ती है



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